Monday, 20 March 2017

सोच ( आजादी है )

ईधर में देखता हूं, क्या हो रहा है
वो तो महिलाओं पे कुछ बोल, चूप हो रहा है ।
वो सोच मैं सिमट गया, सोच में की और क्या
वो फिर खडे हुए, और धर्म पर भी फूंक दिया !!

किंतु मैं तो हु आम आदमी, बुद्धिजीवी सी न क्षमता मुझमें,
वो जो-जो बोल जाएंगे, मेरे तो अच्छे दिन उसी से आएंगे   ।
ना देख मैं दंग रहा, ना सोच ये मैं तंग रहा,
आखिर देश ही न सोच पाया, तो मैं क्या खाक सोचूंगा   ?

बातें बतियाते वो दिल्ली से दुनिया की,
और फिर वो गाते मंगलयान की   !
सोचा उन दिनों क्या हुआ, जब वो बीते सत्तर साल थे,
आजादी तो तब आई जब चौदह में वो आए थे !!

पर फिर से देश बट गया, जनमत में ही वो कट गया,
आज है धर्म से, तो कल वो वर्ण से ज्ञात है ।
बोलने की अब कहा मुझमें तमन्ना रही, वो बस अब मेरे मन में हैं,
जो सुन के भी न सोच पाया, क्या वही देश का जन-मन हैं  ??

Thursday, 19 November 2015

बन्ना का ज्ञान

जिंदगी की इम्तेहाऩ तो बहोत हुई, बन्ना !
शिकस्त मिली तो भी धीरे धीरे |

वो बेमाया-ओ-असबाब तो ऐसे ही बन बैठे,
जैसे ढो रहे हो गम़ दुनिया की तन्हाईयों का |

जीना जमाने में कुछ खास नही है ए- बन्ना !
दुनिया में हम तो बस तन्हा ही रह गए |

बोले, तुम हो मुसाफ़िर इस समंदर के,
डूबना तो कभी बनता नही तुम्हारी फ़ितरत में |

क्या करे इस दुनिया ने बे़गाना कर दीया,
अपनो ने ही बन्ना ! अफसाना कर दीया |

करो एक फसाना तुम भी इस जमाऩे मे !
झुके लोग, झुके दुनिया; तुम्हें भी बनाये वो बन्ना |

Sunday, 25 October 2015

क्षत्राणी

मै दुर्गा की जयेष्ट-पुत्री,क्षात्र-धर्म की शान रखाने आई हूँ !
मै सीता का प्रतिरूप ,सूर्य वंश की लाज रखाने आई हूँ!1!



मै कुंती का अंश लिए ,चन्द्र-वंश को धर्म सिखाने आई हूँ !
मै सावित्री का सतीत्त्व लिए, यमराज को भटकाने आई हूँ !२!

मै विदुला का मात्रत्व लिए, तुम्हे रण-क्षेत्र में भिजवाने आई हूँ ! मै पदमनी बन आज,फिर से ,जौहर की आग भड़काने आई हूँ !३!



मै द्रौपदी का तेज़ लिए , अधर्म का नाश कराने आई हूँ !
मै गांधारी बन कर ,तुम्हे सच्चाई का ज्ञान कराने आई हूँ !४!

मै कैकयी का सर्थीत्त्व लिए ,तुम्हे असुर-विजय कराने आई हूँ ! मै उर्मिला बन ,तुम्हे तुम्हारे क्षत्रित्त्व का संचय कराने आई हूँ !५!



मै शतरूपा बन ,तुम्हे सामने खडी , प्रलय से लड़वाने आई हूँ! मै सीता बन कर ,फिर से कलयुगी रावणों को मरवाने आई हूँ!६!

मै कौशल्या बन आज ,राम को धरती पर पैदा करने आई हूँ ! मै देवकी बन आज ,कृष्ण को धरती पर पैदा करने आई हूँ !७!



मै वह क्षत्राणी हूँ जो, महा काळ को नाच नचाने आई हूँ !
मै वह क्षत्राणी हूँ जो ,तुम्हे तुम्हारे कर्तव्य बताने आई हूँ !८!

मै मदालसा का मात्रत्त्व लिए, माता की महिमा,दिखलाने आई हूँ ! मै वह क्षत्राणी हूँ जो ,तुम्हे फिर से स्वधर्म बतलाने आई हूँ !९!



हाँ तुम जिस पीड़ा को भूल चुके, मै उसे फिर उकसाने आई हूँ ! मै वह क्षत्राणी हूँ ,जो तुम्हे फिर से क्षात्र-धर्म सिखलाने आई हूँ !१०!

Monday, 19 October 2015

राही तेरी राह

चलता रहेता तु ही है राही,
पर मैंने भी चलना है जाना |
दूर से दिखाई दे रहा है वह,
मकसद मेरा सिर्फ उसको है पाना ||

अड़ग राह की यह मंजिल है,
सात समंदर सा यह अंतर है |
जिंदगी का उफान यह दुवीधा सा,
देशभक्त दिवाना मेरा देश अैसा ||

बुलंदीयो को है एक बार छुना,
पर ना कभी उससे मुकरना |
ले जाऊँगा एक दिन मैं उसे आगे,
भले पथ पर हो मुश्केली सदासे ||

आशाऐं बहोत है तुमसे एे-दोस्त,
तुम ही तो हो मेरे ऐ-सरफरोश !
दास्ताँन लिखी जाएगी एक बार,
इस लिए जिना हैं हमें बार बार ||

Thursday, 8 October 2015

न जाने ! अैसा क्यों हुआ ?

आज फिर मन मे एक आग लगी,
न जाने अैसा क्यों हुआ ?
बात करने की मेरी उससे आरजू जगी,
न जाने अैसा क्यों हुआ ?

जहाँन मे आकर वो दूर चला गया,
लेकीन इतना भी दूर ना हुआ |
पास रहकर ही मुझे है सताया,
न जाने अैसा क्यों हुआ ?

उढते-जागते, चलते-ऊछलते,
तुम ही मेरे हमसफर बन रह गऐ |
आज दूर जाने की फिर तमन्ना है जगी,
न जाने अैसा क्यों हुआ ?

बातो ने तेरी मुझे हसाया,
रूलाया भी उन्होने ही है मुझे |
पर न जाने आज ये लिखने का मन कर रहा,
न जाने अैसा क्यों हुआ ?

यह दिल ही तो है जो सँभला है,
पर तेरी यादों ने ये क्या किया ?
गिला है , शिकवा है किन्तु कोई ना दुश्मनी,
पर फिर भी ! न जाने अैसा क्यों हुआ ?

Tuesday, 6 October 2015

भारतवर्ष


रक्त-रंजीनी आज फिर है सजी,
शृंग-गर्त सी धून मन में है बजी |
खड़ग के खयाल ने है यह पाया,
बंदूक से उस खून को था खोया ||

मासूमीयत सी मुश्कान मे भी मिली,
घडी़ संकट कू आज है टली |
शत्रु ने भी जाना है आज यह मूल्य,
घबराये तुम तो हम भी हैं अतुल्य ||

भारतवर्षे विनम्रता, विविधता, विशेषता,
ह्रदय के टुकडे सी है यही कोमलता |
अनेक को जाना, पर मिला ना एक,
राष्ट्र ही हो वह, किन्तु हजारों मे नेक ||

Tuesday, 12 May 2015

Revolution of Delhi University

            Should I have use the word "BIFURCATION" for this controversy of FYUP ? Bifurcation between VC and his team & Teachers Association and the principals of at least 57 colleges.Actually, what the vice-Chancellor has to do that he had done and he is very right on his own view. Anyone can't think like the Revolutionary VC of Delhi University.                                   
            Dinesh singh, who want to give some extraordinary knowledge to students by such a good idea of FYUP. But no one understand what he want to say because of his typical point of FYUP or anything else ? The student of Delhi university want to take knowledge which is variable and different at some point by any other University. Central University should do like that to improve their knowledge power between Teacher-Student relationship. Four year undergraduate is beneficial course for a student who want to gain the knowledge of everything with his/her own favourite chosen subject.                                           On only one point VC is defeated by his Opposition- Infrastructure. Probability of this point will also short out if someone has helped him on this point. Issue of infrastructure is very big because of the syllabus of FYUP. They should develop the colleges on basis of this course and also provide such type of facilites to students. Implement of any point make someone revolutionist. Notion of a person is what that no one can know, but at the regard of education in such a great central university, student can't underestimate with their future. So, the final decision is pending and it will be depend between the case of UGC ( University grant commission ) and Delhi university under High court of Delhi.